महेन्द्र अजनबी की हास्य व्यंग्य की दुनिया में आपका स्वागत है।दिल्ली मे कोंमनवेल्थ गेम्स की तैयारी के कारण ब्लॉग का कार्य निर्माणाधीन है। असुविधा के लिये खेद है।
गुरुवार, 22 जुलाई 2010
कविता
सड़क पर दोड्ते एक व्यक़्ति को हमने रोक कर पूछा कहां? बोला आत्महत्या करने मैने कहा फिर तो मै तुम्हारे बहुत काम आ सकता हूं तुम्हे अपने साथ किसी कविसम्मेलन मे ले जा सकता हूँ वह बोला बस बस रहने दीजिए ये जुल्म मत कीजिए आपको मालूम हें में आत्महत्या करने क्यों जा रहा हूं बात ये है कि अभि अभि तो में एक कविसम्मेलन से छूट्कर आ रहा हूं
सदस्यता लें
संदेश (Atom)